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मेरी मैयत पर आए वो

मेरी मैयत पर आए वो,
भरे दुखी मन से रूंधे गले से,
पूछा किसी से क्या हुआ ,फरिश्ते ने बस इतना कहा- कुछ नहीं बस – इश्क हुआ ।
कौन थी वह जिससे इन्हें इश्क हुआ,
सुन कर नाम अपना तेज कदमों से वो चले
जज्बात अपने न वो संभाल पाए ।
दो आंसू लेकर अपने सुर्ख रुखसारो पर,
अंदर से इस कदर मुस्कुराए ।
दिली ख्वाहिश थी मेरी,
कभी मुस्कुराए मेरे लिए वो
अपनी इस मुस्कुराहट के साथ,
जीवन को दोहरा गए
सांसें गति पा गई, गम पर खुशी छा गई
उस बेरहम को कहा अहसास था,
क्या है प्यार मेरा
और क्या है इस प्यार की गहराई


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